बागवानी में तलाशें भविष्य

 आप जानते ही होंगे हमारे देश की आबादी का बड़ा हिस्सा गावों में रहता है और अपना पालन करने के लिए, अपना घर चलाने के लिए वे लोग क्या काम करते है, ये तो आप जानते ही होगे।

जी हां श्रोताओं खेती, क्योंकि आप कितने भी डिजिटल क्यों न हो जाओ, रोटी डाउनलोड नहीं कर सकते उसके लिए खेती ही करनी होगी। और इस काम को बखूबी निभा रहे हैं हमारे देश के किसान।

कुछ दशक पहले लोगो ने अपने मन में भ्रम पाल लिया था कि खेती करने वाले ज्यादा पैसा कमा नही पाते है और गरीब होते है. मगर 21वीं सदी के युवाओं की सोच बदल चुकी है और वो खेती करके अच्छा पैसा कमा रहे है.

ऐसा माना जाता है कि भारत में खेतों की उत्पादन क्षमता का केवल 30 प्रतिशत ही किसान उपयोग कर पाते है. क्योंकि खेती करने वाले अधिकतर किसान अनपढ़ होते है और वो पुराने तरीके से ही खेती करते है जिसकी वजह से उन्हें नुकसान का भी सामना करना पड़ता है।

लेकिन कहते हैं समय के पास हर मर्ज़ की दवा है।

समय बदला और बदलते समय के साथ हमने कदम रखा बागवानी के क्षेत्र में। जी हॉं श्रोताओं बागवानी। खेती में तेजी से उभरता हुआ कृषि व्यवसाय है बागवानी । इस क्षेत्र में कॅरियर की अपार संभावनाएं हैं। बागवानी को भविष्य की खेती भी कहा जाता है। इसे एक बार लगा देने से कई सालों तक मुनाफा ले सकते हैं। बागवानी अपने अंदर तमाम संभावनाएं समेटे हुए है जो किसानों के लिए भविष्य में सुनहरे आय का एक साधन बन सकती है।

बागवानी जिसका शाब्दिक अर्थ है उद्यान की खेती।

एमएच मैरीगोड़ा को भारतीय बागवानी का जनक माना जाता है ।

किसान साथियों, इसमें कोई शक नहीं कि, आपको प्रकृति से प्यार है और खेती-किसानी की चाह भी है, तो आप भी बागवानी में अपने आप को आजमा सकते हैं। आपको बता दें, कुछ सालों में बागवानी फसलों के उत्पादन में काफी तेजी से ग्रोथ हुआ है। फलों की मांग बाजार में सालभर रहती है। फूलों की बात करें तो इसके उत्पादन में भी काफी वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि बाजारों में इसकी मांग को दिखाता है।


तो आइये आज के इस कार्यक्रम में बागवानी को विस्तार से जानते हैं।


बागवानी एक तेजी से उभरता हुआ कृषि व्यवसाय है। बागवानी कृषि की वह शाखा है जिसमें पौधों की गहन खेती की जाती है, जिनका उपयोग भोजन, औषधी और सौंदर्य संतुष्टि के लिए सीधे तौर पर किया जाता है।

सरल शब्दों में, सब्जियों, फलों, फूलों, जड़ी-बूटियों, सजावटी या विदेशी पौधों की खेती, उत्पादन और बिक्री ही बागवानी है। श्रोताओं क्या आप जानते हैं कि मशरूम उत्पादन, फूलों और फलों की खेती, चाय के बागान से सब बागवानी का ही हिस्सा हैं। 

बागवानी क्षेत्र विकास के प्रमुख चालकों में से एक बन गया है क्योंकि यह कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से खाद्यान्न की तुलना में अधिक लाभदायक है और बागवानी में संभावनाओं और उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने का काम किया जाता है।


बागवानी खेती की बेसिक जानकारी के बाद हमारे किसान भाईयों में बागवानी को लेकर जिज्ञासा पैदा होती है और मन में भी प्रश्न उठते हैं कि भई बागवानी खेती ठीक तो है, लेकिन इससे हमें फायदा कितना होगा तो मैं आपको बता दूं कि

बागवानी फसलें, फल, मौसम की बदलती परिस्थितियों के प्रति अधिक लचीले होते हैं और सब्जियां छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाती हैं। मतलब ऐसे किसान जिनके पास खेती के लिए जमीन और संसाधन कम हैं वे भी बागवानी से अच्छा मुनाफा ले सकते हैं।

फिर बागवानी में पानी का उपयोग बहुत कम होता है, जिससे फसल खराब होने का खतरा कम हो जाता है और यह काम छोटे खेतों पर भी असानी से किया जा सकता है।

साथ ही अधिक उपज पाने और अधिकतम उर्वरकों का उपयोग करने के लिए एक साथ कई फसलें उगाई जाती सकती हैं ।

बागवानी लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए कई तरह के संतुलित आहार लेने में सक्षम बनाता है।

सिंचाई के पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए और नमी के संरक्षण के लिए, किसानों को ड्रिप सिंचाई प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार उत्पादकों द्वारा ड्रिप सिंचाई उपकरणों की खरीद के लिए सहायता / सब्सिडी का प्रावधान है।

नियंत्रित परिस्थितियों में ऑफ-सीजन रोपण और सब्जी नर्सरी बढ़ाने के लिए ग्रीन हाऊस की स्थापना आवश्यक है। इस योजना के अंतर्गत, लाभार्थियों को उनके क्षेत्र में ग्रीन हाउस के निर्माण के लिए सहायता मिल सकती है। 

ग्रीन हाउस खीरा की बात हो या टमाटर की किसान भाई दोनों की फसलों में कलम ग्राफटिंग कर अच्छी पैदावार पा सकते हैं। 

बेल से उगने वाली फसलों में बूंद बूंद सिंचाई करके अच्छी पैदावार के साथ ही पानी की बचत भी कर सकते हैं, और राजस्थान की जलवायु को देखते हुए नींबू का उत्पादन हमारे किसान भाई कर सकते हैं आर साथ ही साथ मौसंबी और खजूर का उत्पादन भी कर सकते हैं।


बागवानी देश के कई राज्यों में आर्थिक विकास का प्रमुख चालक बन गया है, जहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का बागवानी प्रभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


बागवानी में फलों, सब्जियों, मशरूम, कट फूलों, सजावटी फूलों और पौधों, मसालों, औषधियों फसलों का प्रमुख स्थान है जिससे किसान को फायदा होता है। बागवानी को भविष्य की खेती भी कहा जाता है जो किसानों की आय के साथ-साथ जीवनस्तर में भी सुधार करता है।

बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ाने और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) का क्रियान्वयन किया गया। 

एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच)

फलों, सब्जियों और अन्य क्षेत्रों को कवर करते हुए बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्र प्रायोजित एक योजना -

एमआईडीएच। और इस योजना में भारत सरकार सभी राज्यों में विकास कार्यक्रमों के लिए कुल परिव्यय का लगभग 60% योगदान देती है ( पूर्वाेत्तर और हिमालयी राज्यों को छोड़कर, जहां भारत सरकार लगभग 90% योगदान देती है) और 40% योगदान राज्य सरकारों का होता है।

भारतीय बागवानी क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने की संभावनाएँ काफी ज़्यादा हैं, जो वर्ष 2050 तक देश के 650 मिलियन मीट्रिक टन फलों और सब्जियों की अनुमानित मांग को पूरा करने के लिये ज़रूरी है।


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